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Ambala today news: पढ़िए खबर: मेरी डोली मेरे अंगना मुझे मेरे बचपन की याद दिलाता है अर्चना दमोहे

अंबाला कवरेज @ मुंबई: प्रतिभाशाली अभिनेत्री अर्चना दमोहे टेलीविजन पर सबसे ज्यादा सराही जाने वाली दादी हैं। भारत में गांव प्रेमियों के पहले एंटरटेनमेंट चैनल आज़ाद के नए शो मेरी डोली मेरे अंगना में इस समय गोमती देवी (दादी) का रोल निभा रहीं अर्चना एक बार फिर दर्शकों को लुभा रही हैं। मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली अर्चना को एक लेखक और अभिनेत्री के रूप में कई सफल शोज़ में काम करने का व्यापक अनुभव है। उन्होंने स्वामीनारायण, प्राणनाथ, तुझ संग प्रीत लगाई सजना, बच्चा पार्टी, काहे दिया परदेस, तू अंखी मु आइना, क्राइम अलर्ट और क्राइम पैट्रोल जैसे शोज़ में एक स्वतंत्र लेखक के रूप में काम किया है। एक एक्टर के रूप में, उनके सर्वश्रेष्ठ कामों में अजीब दास्तान, गुब्बारे, रिश्ते, आन, प्रीत ना जाने रीत, तलाक क्यों, राज की एक बात, कसम, 1857 क्रांति और उनका वर्तमान शो, मेरी डोली मेरे अंगना शामिल हैं।

आपने किस बात से प्रेरित होकर आज़ाद के नए शो ‘मेरी डोली मेरे अंगना’ को स्वीकार किया?
आज़ाद जैसे शानदार चैनल और इसके पहले प्राइम टाइम ओरिजिनल शो ‘मेरी डोली मेरे अंगना’ का हिस्सा बनना मेरे लिए सौभाग्य की बात है, क्योंकि हम गांव प्रेमियों और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले 80 प्रतिशत दर्शकों के लिए यह शो बना रहे हैं, जिनके बारे में कभी किसी ने नहीं सोचा था। हमारे चैनल की एक टैग लाइन है “हमारी मिट्टी हमारा आसमान” और इस लाइन का अपने आप में एक सुंदर मतलब है। एक ऐसे शो का हिस्सा बनना, जो हमारे देश की 80 प्रतिशत आबादी को प्रभावित करेगा, एक अभिनेता के जीवन में बहुत ही खुशनुमा पल होता है।Ambala today news: पढ़िए खबर: मेरी डोली मेरे अंगना मुझे मेरे बचपन की याद दिलाता है अर्चना दमोहे

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इस शो में अपने रोल के बारे में बताएं?
इस शो में मैं परिवार की मुखिया गोमती देवी सिंह की भूमिका निभा रही हूं। वो पूरे परिवार के लिए मां की तरह हैं। वो सबसे अनुशासित व्यक्ति हैं और अब भी अपने रीति-रिवाजों और परंपराओं से जुड़ी हैं। उनके लिए केवल एक चीज मायने रखती है, और वो है उनकी संस्कृति। वो एकमात्र ऐसी इंसान हैं, जिन्होंने कभी डांट और कभी प्यार से अपने परिवार को टूटने से बचाए रखा है। एक प्यारी लेकिन सख्त, उच्च मूल्यों और सिद्धांतों वाली बूढ़ी औरत, जो पुरानी परंपराओं से गहरे तक जुड़ी हैं। वो एक स्पष्टवादी महिला हैं, जो सही और गलत को लेकर पक्षपात नहीं करती हैं। वो दो बेटों और एक बेटी की मां हैं।

आज़ाद गांव प्रेमी दर्शकों के लिए है? इस कहानी में ऐसा क्या है, जो इसे बाकी शोज़ से अलग बनाता है?
हमारा शो अन्य शोज़ से अलग है, क्योंकि यह कहानी संयुक्त पारिवारिक रिश्तों के बारे में है जिसमें संस्कृति, परंपराएं और ईमानदार पारिवारिक रिश्ते हैं। यह कहानी किसी भी उम्र, जाति और धर्म के दर्शकों लिए बहुत ही सरल और आसान है। वे इस शो को देखकर खुद अपनी ज़िंदगी के सफर का आईना देख सकेंगे।

आपने इस शो की तैयारी कैसे की?
मुझे शो के लिए ज्यादा तैयारी नहीं करनी पड़ी क्योंकि मेरे पूर्वज कानपुर और बिठूर से हैं और हमारी कहानी इन्हीं जगहों पर आधारित है। जब भी मैं इस शो के लिए शूटिंग करती हूं, तो अक्सर मैं अपने बचपन के दिनों के बारे में सोचने लगती हूं क्योंकि इस शो के किरदारों और मेरे असली परिवार के सदस्यों में बहुत-सी बातें एक जैसी हैं और यही कारण है कि यह शो मेरे दिल के बहुत करीब है।

इस महामारी के बीच में शूटिंग कैसे हो रही है?
इस समय चल रही कोविड महामारी में शूटिंग करने से हम सभी बहुत डरे हुए थे, लेकिन जब हम शूटिंग कर रहे थे, तो हमारी सारी चिंताएं दूर हो गईं और अब हमें कोई समस्या नहीं है, क्योंकि चैनल और प्रोडक्शन हाउस हमसे ज्यादा फिक्रमंद थे और उन्होंने हमारी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी तरह के एहतियात बरते। उन्होंने सरकार द्वारा बनाए गए सभी प्रोटोकॉल का पालन किया है।

अपने शुरुआती वर्षों के बारे में बताएं। आप एक्टर कैसे बनीं?
मुझे अपने स्कूल के दिनों से ही अभिनय का शौक था। यह मेरे कॉलेज के दिनों में भी जारी रहा। मैं कई शोज़ में हिस्सा लेती थी। इंदौर के थिएटर ग्रुप, आरंक का हिस्सा बनकर मैंने इस क्षेत्र के अमूल्य गुर और अभिनय की बारीकियां सीखीं। मैंने संस्कृत शो भगवदज्जुकम और वसंत सबनीस का सैया भये कोतवाल, मोहन राकेश का आधे अधूरे, मंटो का टोबा टेक सिंह एक्ट किया। जब मैं शादी के बाद मुंबई आ गई, तो यह कुछ समय के लिए रुक गया, लेकिन जब मुझे फिर से मैदान में उतरने का मौका मिला, तो मैं इतिहास में मास्टर डिग्री होने के बावजूद एक्टिंग के बारे में सोच रही था। मैं कहीं भी आसानी से शिक्षक या ट्यूटर बन सकती थी, लेकिन मेरा पूरा ध्यान एक्टिंग पर ही था। ऐसा लगा जैसे वाह… फिर से! मैं सत्यनवेशी समूह के साथ थिएटर शोज़ करने लगी। पृथ्वी थिएटर के मंच पर, मिस मंदिरा कश्यप ने मुझे स्टार प्लस के शो अजीब दास्तान में एक भूमिका की पेशकश की। तब से, मैं पिछले 20 वर्षों में हिंदी, राजस्थानी, भोजपुरी और मराठी टीवी शोज़ में काम कर रही हूं। एक्टिंग के अलावा, मुझे शोज़ के लिए कहानियां और संवाद लिखने में भी काफी दिलचस्पी थी। इसलिए, जब परिवार की जिम्मेदारियां आ गईं, तो मैंने लेखन का सहारा लिया। 2017 में, मैं टीवी स्क्रीन पर वापस लौटी और इस बार 2 मराठी शोज़ – काहे दिया परदेस और बालुमामा चा नवाना चांगभला में काम किया। और फिर कोविड-19 लॉकडाउन ने हम सभी को प्रभावित किया। लेकिन फिर, मैं भाग्यशाली थी कि मुझे फिर से अभिनय करने का मौका मिला, ‘मेरी डोली मेरे अंगना’ जैसे शानदार शो के लिए आज़ाद टीवी और टैल ए टेल मीडिया को धन्यवाद। मैं अब तक इस सफर के हर पल का मजा ले रही हूं।

अपने अब तक के कार्यों के बारे में बताएं?
मैं एक लेखक और एक एक्टर हूं और मैं भाग्यशाली रही हूं कि मुझे कुछ बढ़िया काम मिले। मैंने स्वामीनारायण, प्राणनाथ, तुझ संग प्रीत लगाई सजना, बच्चा पार्टी, काहे दिया परदेस, तू अंखी मु आइना, क्राइम अलर्ट, क्राइम पैट्रोल और एमडीएमए में एक स्वतंत्र लेखक के रूप में काम किया है। एक एक्टर के रूप में अजीब दास्तान, गुब्बारे, रिश्ते, आन, प्रीत ना जाने रीत, तलाक क्यों, राज की एक बात, कसम, 1857 क्रांति जैसे शोज़ और मेरा वर्तमान शो, मेरी डोली मेरे अंगना शामिल हैं।

आपको टीवी पर काम करना क्यों आकर्षक लगता है?
टीवी पर काम करने से हमें लाखों लोगों तक, उनके घरों में पहुंचने में मदद मिलती है। हम उन पर, उनके जीवन पर और उनके परिवार के सदस्यों पर बहुत प्रभाव डाल सकते हैं और हमें उनका बहुत सारा आशीर्वाद और प्यार भी मिलता है। यह किसी अन्य माध्यम में संभव नहीं है।

आपके पसंदीदा शौक क्या हैं?

मुझे लेखन और अभिनय पसंद है जो मेरा पेशा है और साथ ही, मुझे किताबें और उपन्यास पढ़ना पसंद है।

आप किस जगह पर छुट्टियां बिताना चाहेंगी?
भारत में मुझे कश्मीर और केरल की यात्रा करना बहुत पसंद है और अगर विदेशों की बात करें तो मैं मॉरीशस जाना चाहूंगी।

आपके लिए क्या महत्वपूर्ण है?
मेरी ज़िंदगी में मेरे लिए सबसे जरूरी चीज है मेरा परिवार और मेरा काम। फिर मेरा कार्यस्थल है और जिन लोगों के साथ मैं काम करती हूं।

आपके लिए आज़ाद होने का मतलब क्या है?
यह मेरा सौभाग्य और आभार है कि मुझे आज़ाद परिवार का हिस्सा बनने का मौका मिला। उनके साथ काम करना बड़ा खुशनुमा अनुभव है। सभी लोग और हमारी पूरी टीम जमीन से जुड़ी है, मृदुभाषी और व्यावहारिक है। ऐसे सकारात्मक और बढ़िया माहौल में काम करके बड़ी खुशी और सुकून महसूस करती हूं।
देखिए मेरी डोली मेरे अंगना, हर सोमवार से शनिवार रात 9 बजे आज़ाद पर। यह चैनल टाटा स्काई पर 183, डीडी फ्रीडिश चैनल नंबर 36 पर उपलब्ध है और एमएक्स प्लेयर पर मुफ्त में देखा जा सकता है।

बिगिनेन मीडिया
बिगिनेन मीडिया की शुरुआत अक्टूबर 2019 में हुई थी और इसका मुख्यालय मुंबई में स्थित है। जैसा कि इसका नाम है, बिगिनेन असल में जर्मन शब्द है, जिसका मतलब है ‘कुछ नए की शुरुआत’। इस संस्थान का उद्देश्य जनता-आधारित उत्पादों और सेवाओं को बढ़ावा देना है। यह ग्रामीण दर्शकों के लिए विशेष तौर पर तैयार की गई प्रभावशाली कहानियों के जरिए उन्हें एक बढ़िया अनुभव देना चाहता है और हर उस जगह मौजूद रहना चाहता है, जहां दर्शक हैं। जो जन-आधारित विचारधारा बिगिनेन मीडिया को परिभाषित करती है, उसमें लंबे समय तक ग्राहकों से रिश्ता बनाए रखने के सिद्धांत शामिल हैं। इसका उद्देश्य नए, विश्वसनीय, रचनात्मक मनोरंजक अनुभव देना और संबंधित मल्टीमीडिया उत्पादों को विकसित करना है। बिगिनेन मीडिया का रणनीतिक मूल्य है नवीनता, जो इसकी कॉरपोरेट संस्कृति का मूलभूत हिस्सा है। यह संस्थान, संगठन की शक्ति में यकीन रखता है और इसके प्रमुख मूल्यों में लोगों की मांग का ख्याल रखना, सभी को शामिल करना, विविधता अपनाना, संवेदनशील रहना, बाजार पर केंद्रित रहना और सभी तक पहुंच बनाना शामिल है।
www.beginnenmedia.com
आज़ाद चैनल
बिगिनेन मीडिया की पहली पेशकश है आज़ाद, जो भारत का पहला ऐसा प्रीमियम हिंदी एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म है, जिसमें विशेष तौर पर ग्रामीण विचारधारा और ग्रामीण परिवेश के लिए कार्यक्रम दिखाए जाएंगे। पीपल फर्स्ट. रूरल फर्स्ट (सबसे पहले जनता, सबसे पहले ग्रामीण) के अपने उद्देश्य के साथ आज़ाद चैनल, मई 2021 से डीडी फ्री डिश और प्रमुख क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे चुनिंदा डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म ऑपरेटर्स पर उपलब्ध है। इसमें ड्रामा, एक्शन और रोमांस के साथ-साथ मनोरंजक फिल्में और बच्चों के कार्यक्रम आदि दिखाए जा रहे हैं। आज़ाद डीडी फ्री डिश पर चैनल नंबर 36 पर उपलब्ध है।Ambala today news: पढ़िए खबर: मेरी डोली मेरे अंगना मुझे मेरे बचपन की याद दिलाता है अर्चना दमोहे

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Author: Ambala Coverage

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