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Ambala Coverage News 1857 की क्रांति के शहीदों को ऐतिहासिक सम्मान ! जाने कैसा होगा भव्य स्मारक का निर्माण

अमित कुमार
अंबाला कवरेज @ अंबाला ।  हरियाणा सरकार द्वारा आजादी की पहली लड़ाई में शामिल और शहीद हुए लोगों और वीर जवानों की बहादुरी एवं शहादत को नमन करने हेतु अम्बाला कैंट के नजदीक अंबाला-नई दिल्ली नेशनल हाईवे-एनएच 44 पर 22 एकड़ भूमि पर एक भव्य और विशाल शहीद स्मारक का निर्माण किया जा रहा है। सूचना, जनसम्पर्क, भाषा एवं संस्कृति विभाग हरियाणा की ओर से इस शहीद स्मारक के लिए प्रतीक चिन्ह (लोगो) तैयार करने हेतु इच्छुक व्यक्ति/डिजाइनर/कलाकार एवं आमजन से प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं। जिस व्यक्ति के प्रतीक चिन्ह (लोगो) का चयन होगा उसे विभाग की ओर से एक लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा। प्रविष्टियां भेजने की अन्तिम तिथि 1 अप्रैल 2025 को सायं 5 बजे तक है। प्रतिभागी को अपनी प्रविष्टियां भेजते समय निर्धारित नियमों एवं शर्तों का पालन करना होगा। यह जानकारी शहीद स्मारक के निदेशक डॉ. कुलदीप सैनी ने दी।
ये हैं प्रविष्टियां भेजने के नियम एवं शर्तें:-
डॉ. सैनी ने बताया कि सूचना, जनसम्पर्क एवं भाषा विभाग, हरियाणा तथा संवाद सोसायटी के अधिकारियों और कर्मचारियों को छोडकऱ सभी प्रतिभागी अपनी प्रविष्टियां एस.सी.ओ. नं. 200-201, सेक्टर 17-सी, चंडीगढ़ कार्यालय में अन्तिम तिथि 1 अप्रैल 2025 को सायं 5 बजे तक भिजवा सकते हैं। इसके बाद कोई भी प्रविष्टि मान्य नहीं होगी। प्रविष्टि 1857 की क्रांति (भारत की आजादी की पहली लड़ाई) की थीम पर ही आधारित होगी। उन्होंने बताया कि प्रतीक चिन्ह में ग्राफिक एलिमेंट, आइकॉन, शेप, कलर, बैकग्राउंड, फोंट ले आउट इत्यादि रहने चाहिए। प्रतीक चिन्ह ऐसा हो जो स्मारक की पहचान को दर्शाता हो। प्रतीक चिन्ह प्रेरणादायक होना चाहिए। प्रतीक चिन्ह क्लासिक, विंटेज व मॉडर्न किसी भी प्रकार का बनाया जा सकता है। प्रतीक चिन्ह में मोनोग्राम, वर्ड माक्र्स, हिस्टोरिक माक्र्स, एबस्ट्रेक्ट मार्कस भी हो सकते हैं किन्तु यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रतीक चिन्ह सिंपल, मेमोरेबल, रिलेवेंट, टाइमलेस व वर्सेटाइल हो।

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निदेशक शहीद स्मारक ने बताया कि प्रतिभागी अपने प्रतीक चिन्ह के ऊपर कोई वाटर मार्क नहीं डालेगा यानी प्रतीक चिन्ह के ऊपर कुछ नहीं लिखेगा। प्रतीक चिन्ह भेजने की अन्तिम तिथि 1 अप्रैल 2025 को सायं 5 बजे तक होगी। सभी प्रतीक चिन्ह हाई रेजोल्यूशन में हो और नीचे उल्लेखित कैप्शन के साथ तकनीकी दृष्टि से सुदृढ़ होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस प्रतीक चिन्ह का चयन होगा वह सरकार की संपत्ति मानी जाएगी और सरकार उस प्रतीक चिन्ह का कहीं भी उपयोग करने के लिए पूर्ण रूप से स्वतंत्र होगी। प्रतीक चिन्ह भेजने वाले प्रतिभागी का इस पर कोई अधिकार नहीं रहेगा। कोई भी प्रतीक चिन्ह कॉपीराइट नहीं नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रतिभागी पर आयु और राष्ट्रीयता की कोई पाबन्दी नहीं है परन्तु थीम 1857 की क्रांति (भारत की आजादी की पहली लड़ाई) पर ही आधारित होनी चाहिए। सभी प्रतीक चिन्ह पर प्रतिभागी के हस्ताक्षर होने चाहिए और प्रतीक चिन्ह (लोगो) का साईज 12&15 होना चाहिए। प्रतिभागी को अपनी प्रविष्टि व प्रतीक चिन्ह ई-मेल  पर भी भेजनी होगी। भेजे जाने वाले प्रतीक चिन्ह का पूर्व में प्रकाशन व प्रदर्शन न हुआ हो। प्रतिभागियों द्वारा अपनी प्रविष्टि व्यक्तिगत ई-मेल से उपरोक्त ई-मेल पते पर भेजनी होगी। प्रत्येक प्रतीक चिन्ह जेपीजी-जेपीईजी फॉर्मेट में अपलोड किया जाए और इसका साईज 10 एमबी से अधिक नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रतिभागियों द्वारा तैयार किए गए प्रतीक चिन्ह हस्ताक्षरित एवं पूर्ण भरे हुए रजिस्ट्रेशन और डिक्लेरेशन फॉर्म के साथ भेजे जाएं। एक बार प्रविष्टि मेल अथवा डाक द्वारा भेजे जाने के बाद उसमें कुछ भी बदलाव/निरस्तीकरण/जोडऩा मान्य नहीं होगा।

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कमेटी द्वारा किया जाएगा प्रतीक चिन्ह का चयन:-
डॉ. कुलदीप सैनी ने बताया कि सूचना, जनसम्पर्क, भाषा एवं  संस्कृति विभाग, हरियाणा के पास बिना किसी कारण अथवा स्पष्टीकरण के किसी भी प्रतिभागी की प्रविष्टि को अयोग्य और निकालने का अधिकार सुरक्षित रहेगा। प्रविष्टि अथवा प्रतीक चिन्ह में कोई भी व्यावसायिक सामग्री नहीं होनी चाहिए जो किसी भी उत्पाद या सेवा को बढ़ावा दे। बिना पूर्व सूचना के आवश्यकता पडऩे पर आयोजक के पास प्रतीक चिन्ह संबंधी पुरस्कार में परिवर्तन और नियमों/अधिनियमों में संशोधन करने का अधिकार सुरक्षित रहेगा। प्रतीक चिन्ह का चयन कमेटी द्वारा किया जाएगा और कमेटी का निर्णय अंतिम होगा। चयन प्रक्रिया और निर्णय से संबंधित किसी भी पत्राचार पर विचार नहीं किया जाएगा। यह प्रक्रिया गोपनीय रहेगी।

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Author: Ambala Coverage

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