वेब स्टोरी

ई-पेपर

लॉग इन करें

शिक्षा विभाग के एसीएस की चुप्पी मतलब, फीस जमा न करवाने वाले बच्चों का नाम कटना तय!

चंडीगढ़ (अंबाला कवरेज)। लॉक डाउन के बाद लगातार स्कूलों की फीस को लेकर अभिभावकों व स्कूल संचालकों के बीच खींचतान चलती आ रही है। जहां एक ओर अभिभावक लगातार फीस माफ किए जाने की मांग उठा रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ सरकार ने समय समय पर लेटर जारी कर यह स्पष्ट कर दिया कि अभिभावकों को मंथली फीस जमा करवानी होगी। मार्च के बाद से लगातार चल रही आपसी इस खींचतान के बाद शिक्षा विभाग के एसीएस डॉ. महावीर सिंह की तरफ से 9 जून को जारी किए गए लेटर में लिए गए शब्दों के बाद कानूनी जानकारी यह मानते हैं कि यदि अभिभावक बच्चे की फीस नहीं देंगे, तो स्कूल संचालकों को एक्ट के अनुसार नाम काटने का अधिकार होगा।
वैसे हमने एसीएस की ओर से जारी किए गए लेटर को लेकर पिछले तीन दिनों में कई बार फोन किया, मैसेज किए और यहां तक व्हाटसएप पर मैसेज करके जारी किए गए लेटर के संबंध में स्पष्ट आदेश जानने का प्रयास किया, लेकिन एसीएस डॉ. महावीर सिंह की चुप्पी यह स्पष्ट करती है कि 15 जून के बाद निजी स्कूल संचालक फीस जमा न करवाने वाले अभिभावकों के बच्चों का नाम काटने की प्रक्रिया पर काम करने का फैसला कर चुके हैं। यहां पर हम आपको बता दें कि सरकार लगातार यह स्पष्ट करती रही है कि यदि अभिभावक ट्यूशन फीस नहीं देंगे तो निश्चिततौर पर स्कूल के हालात खराब होंगे और अधिकतर अभिभावकों द्वारा अभी तक स्कूलों की फीस जमा नहीं करवाई गई है, जिसके कारण अधिकतर स्कूल चालक अपने स्टाफ को सेलरी तक नहीं दे पाएंगे। जिन्होंने पिछले तीन महीनों में आॅन लाइन के माध्यम से घर पर बैठे बच्चों को शिक्षा देने का काम किया।

एसीएस की ओर से 9 जून को जारी किए गए लेटर की कॉपी


‘अंबाला कवरेज’ को मिले लेटर के हर बिंदू को बारिकी से पढ़ने के बाद यह स्पष्ट हो जाता है कि एसीएस महावीर फौगाट ने अपने ही आदेशों को खुद ही बदल दिया। डॉ. महावीर सिंह की तरफ से 1 जून को लेटर जारी करते हुए रोहतक मंडल कमीश्नर व फीस एगुलेटरी कमेटी के चेयरमैन होने के नाते फार्म-6 के अनुसार स्कूलों को अधिकार दिया था कि वह फीस बढ़ाकर ले सकते हैं, लेकिन एक जून को एसीएस डॉ. महावीर सिंह ने लेटर जारी करते हुए आदेशों पर रोक लगा दी और अपने जारी किए गए लेटर में प्वार्इंट नंबर-9 में स्पष्ट किया कि कोई भी स्कूल संचालक फीस जमा न करवाने पर किसी बच्चे का नाम नहीं काटेगा, लेकिन एसीएस ने 9 जून को फिर से लेटर जारी किया और उसमें 1 जून के लेटर का हवाला देते हुए स्पष्टतौर पर लिखा कि प्वार्इंट नंबर 9 को रिमूव किया जाता है ‘जिसमें लिखा था कि फीस जमा न करवाने पर किसी बच्चे का नाम नहीं काटा जाएगा’। एसीएस द्वारा 9 जून को जारी किए गए लेटर के बाद कानूनी जानकारों के साथ साथ स्कूल संचालकों ने कहा कि अब वह फीस जमा न करवाने वाले का एक्ट के अनुसार नाम काट सकते हैं।
इसके बाद तीन दिन लगातार अंबाला कवरेज की टीम ने एसीएस से इस संबंध में स्पष्ट आदेश जानने का प्रयास किया, लेकिन उनकी तरफ से न तो फोन को जवाब दिया गया, और न ही व्हाटसएप पर कोई मैसेज का जवाव दिया। आखिर में टीम द्वारा लिखकर भेजा गया कि इसका मतलब ‘अब यह सम­ाा जाए कि जो अभिभावक स्कूल फीस जमा नहीं करवाएंगे उन बच्चों का एक्ट के अनुसार नाम काट सकते हैं, आपके लेटर का मतलब यह सम­ाा जाए’। लेकिन एसीएस की ओर से इस का भी जवाब नहीं दिया गया, जिसका मतलब यह सम­ाा जाए कि अब फीस जमा न करवाने वाले अभिभावकों की लापरवाही खामियाजा बच्चों को नाम कटवाकर चुकाना होगा।


सरकार ने जारी किया था लेटर, 15 जून तक जमा करवाए फीस
सरकार ने पिछले दिनों लेटर जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया कि जिन अभिभावकों ने अप्रैल व मई की फीस जमा नहीं करवाई है वह अभिभावक लिखित में आग्रह करते हुए स्कूल संचालकों को दें और अप्रैल व मई की ट्यूशन फीस को तीन किस्तों में बनाकर जून, जुलाई और अगस्त की मासिक ट्यूशन फीस में जमा करवाए। साथ ही सरकार ने स्पष्टतौर पर कहा था कि अभिभावक मंथली आधार पर 15 तारीख से पहले फीस जमा करवाएं। एसीएस की ओर से जारी किए गए लेटर के बाद यह तो पूरी तरह साफ हो गया कि यदि फीस जमा नहीं करवाई जाती तो कहीं न कहीं उन अभिभावकों के बच्चों के स्कूल से नाम स्कूल संचालक काट सकते हैं।
अभिभावकों के लिए भी राहत की बात
एसीएस की तरफ से जारी किए गए लेटर में स्पष्टतौर पर कहा गया है कि कोई भी स्कूल संचालक किसी तरह के ट्यूशन फीस के अलावा कोई फंड नहीं लेगा। न तो बिल्डिंग फंड मांगा जाएगा और न ही एनुअल चार्ज। वहीं ट्रांसपोर्टेशन के चार्ज लेने पर भी रोक लगा दी गई है। वहीं एसीएस के आदेशों में यह भी लिखा गया है कि स्कूल संचालक पिछले साल यानि 2019-20 के सत्र की फीस लेगा और फीस बढ़ाकर नहीं लेगा। चाहे उसमें वह फार्म-6 के ही तर्क क्यों न दिए जा रहे हों।
लेटर के अनुसार स्कूल संचालकों को नाम काटने का अधिकार: मैनी
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट पंकज मैनी ने कहा कि लेटर के अनुसार स्कूल संचालकों को फीस जमा न करवाने वाले अभिभावकों के बच्चों का नाम काटने का पूरा अधिकार होगा। उन्होंने कहा कि एसीएस डॉ. महावीर सिंह के आदेशों मे स्पष्टतौर पर प्वार्इंट नंबर 9 को रिमूव किया गया है, जिसमें नाम काटने पर रोक है। सरकार की तरफ से 15 जून तक फीस जमा करवाने की आखिरी समय दिया गया है और जो नहीं देंगे, उनका नाम काटा जा सकता है।

एसीएस की ओर से 1 जून को जारी किए गए लेटर की कॉपी

अधिकारियों के आदेश कंफ्यूज करने वाले हैं : अजय गुप्ता
पेरेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान अजय गुप्ता ने कहा कि एसीएस के आदेश अभिभावकों को परेशान करने वाले हैं। एसीएस पहले आदेश देते हैं कि फीस जमा न करवाने वाले अभिभावकों के बच्चों के नाम न काटे जाए, लेकिन 9 जून को जारी किए गए लेटर में यह प्वार्इंट को डिलिट करने की बात करते हैं। जोकि अभिभावक विरोधी फैसला है। लॉक डाउन के कारण हर किसी के बिजनेस डाउन हैं और ऐसे में किसी बच्चे का नाम काटा जाता है तो उस अभिभावक की परेशानी बढ़ जाएगी। एसीएस ने अपने ही आदेशों के प्वार्इंट नंबर 9 को रिमूव किया है। जिसको लेकर असमंजस की स्थिति है। अधिकारियों को स्पष्ट आदेश करने चाहिए। वहीं अजय ने कहा कि स्कूल संचालकों को फीस बढ़ाकर लेने से मना किया गया है, लेकिन अभी भी अभिभावकों से फीस बढ़ाकर मांगी जा रही है।
फीस जमा न होने के कारण नहीं दे पा रहे सेलरी: प्रशांत मुंजाल
अंबाला सहोदय के प्रधान राजीव मेहता व महासचिव प्रशांत मुंजाल ने कहा कि स्कूलों के पास करीब 10 प्रतिशत फीस आई है और अभिभावकों द्वारा ट्यूशन फीस न देने के कारण स्टाफ को सेलरी देना मुश्किल है। टीचर्स ने लॉक डाउन में घर से पूरा काम किया, लेकिन अभिभावकों की तरफ से कोई सहयोग न होने के कारण वह सेलरी नहीं दे पा रहे। वहीं उन्होंने कहा कि एक्ट के अनुसार यदि कोई अभिभावक एक महीने तक फीस जमा न करवाए तो स्कूल को अधिकार होता है कि वह नाम काट सकता है, लेकिन स्कूल संचालक इस विशेष परिस्थितियों को देखते हुए अभिभावकों को तीन महीने से सहयोग करते आ रहे हैं। अधिकतर अभिभावकों न तो फीस दी और न स्कूलों को लिखित में फीस जमा न करवा सकने का आग्रह लेटर दिया। सरकार ने स्पष्ट कह दिया है कि अभिभावक 15 तारीख तक फीस जमा करवाए और यदि अभिभावक फीस जमा नहीं करवाते तो निश्चिततौर पर नाम काटने जैसे फैसला लेना स्कूल संचालकों की मजबूरी होगा।

Ambala Coverage
Author: Ambala Coverage

Leave a Comment

और पढ़ें

Казино Пинко предлагает удовольствие для всех любителей уникальных развлечений. Здесь вас ждет разнообразие настольных игр. Не упустите шанс погрузиться в атмосферу выигрыша с непревзойденными бонусами. Присоединяйтесь к онлайн-платформе и начните наслаждаться уже сегодня!

Игровое заведение Пинко предлагает захватывающий опыт для всех фанатов азартных игр. Откройте сферу слотов, где вас ждет большое разнообразие игр. Пинко казино дарит незабываемые эмоции и возможность заработать джекпоты. Заходите в мир азартных игр уже в эту минуту и узнайте свои силы в азартных развлечениях.

और पढ़ें

Казино Пинко предлагает удовольствие для всех любителей уникальных развлечений. Здесь вас ждет разнообразие настольных игр. Не упустите шанс погрузиться в атмосферу выигрыша с непревзойденными бонусами. Присоединяйтесь к онлайн-платформе и начните наслаждаться уже сегодня!

Игровое заведение Пинко предлагает захватывающий опыт для всех фанатов азартных игр. Откройте сферу слотов, где вас ждет большое разнообразие игр. Пинко казино дарит незабываемые эмоции и возможность заработать джекпоты. Заходите в мир азартных игр уже в эту минуту и узнайте свои силы в азартных развлечениях.