-केवल शिक्षा विभाग से मान्यता लेकर कागजों में चल रहा पूरा खेल, बोर्ड परीक्षा से पहले शिक्षा विभाग ने लिया एक्शन तो कई बड़े स्कूल भी हो सकते हैं अनियमितता में शामिल
अमित अठवाल @ अंबाला कवरेज। निजी स्कूलों पर शिकंजा कसने का दिखावाकर करके अभिभावकों का भरोसा जीतने का दावा करने वाला शिक्षा विभाग व अधिकारी अब खुद ही सवालों के घेरे में हैं। अंबाला शहर में एसआर सीनियर सेकेंडरी स्कूल और एसआर हाई स्कूल के नाम पर दो स्कूल चल रहे हैं। जुटाए तथ्यों की बात करें तो इन स्कूलों में न तो बच्चों को पढ़ाया जा रहा है और न ही क्लासें लगाई जाती है, लेकिन अटैचमेंट करते हुए बड़ा खेल खेला जा रहा है। हालात यह है कि सालों से यह खेल चल रहा है, लेकिन शिक्षा विभाग के किसी भी अधिकारी ने अभी तक न तो इस स्कूल के खिलाफ किसी तरह की कोई कार्रवाई की और न ही अटैचमेंट करने वालों पर शिकंंजा कसा।
जुटाए तथ्यों की बात करें तो एसआर सीनियर सेकेंडरी स्कूल और एसआर हाई स्कूल को चलाने वाली मैनेजमेंट नियमों को ताक पर रखते हुए केवल अटैचमेंट करने में लगी है और सूत्र बताते हैं कि केवल अटैचमेंट के नाम पर ही हर साल लाखों रुपए का खेल कर दिया जाता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि सालों से यह खेल चल रहा है, लेकिन किसी भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस स्कूल का आज तक न तो निरीक्षण किया और न ही निरीक्षण करने की जरूरत महसूस की। चर्चाओं की बात की जाए तो शिक्षा विभाग में काम करने वाले कुछ अधिकारी व कर्मचारियों का कहना है कि स्कूल कैसे चल रहा है यह बात सभी जानते हैं, लेकिन कार्रवाई कोई करना नहीं चाहता। आखिर कार्रवाई शिक्षा विभाग क्यों नहीं करना चाहता, इस सवाल पर हर कोई चुप्पी साध लेता है।
क्या है अटैचमेंट का खेल, समझे पूरी मामला
अभी बात केवल नग्गल एरिया की जाए तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि एरिया में कई नामी स्कूल चल रहे हैं, लेकिन उनके पास शिक्षा विभाग से केवल आठवीं क्लास तक ही पढ़ाने की परमिशन है। ऐसे में नियमों को ताक पर रखते हुए यह स्कूल संचालक 12वीं क्लास तक बच्चों को पढ़ाने में लगे हैं। जुटाए तथ्यों की बात करें तो भिवानी शिक्षा बोर्ड में 9वीं में इनरोलमेंट नंबर जाता है और एसआर सीनियर सेकेंडरी स्कूल व एसआर हाई स्कूल संचालक बोर्ड में इनरोलमेंट के नाम पर ही एरिया के नामी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों को अपने रिकॉर्ड में दिखा देता है। फिलहाल मामला कुछ भी रहे, लेकिन यह पूरी तरह साफ है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच हुई तो निश्चिततौर पर अटैचमेंट करने वाले के साथ साथ अटैचमेंट करवाने वाले स्कूलों की भी परेशानी बढ़ जाएगी।
एक स्कूल की खंडहर हो चुकी बिल्डिंग, फिर भी पढ़ते हैं बच्चे
एसआर हाई स्कूल के नाम इन्ही का एक ओर स्कूल चल रहा है, लेकिन सवाल यह है कि इस स्कूल के पास तो बिल्डिंग तक नहीं। फिर वह बच्चे कहां पर और कैसे बढ़ रहे हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी यदि मामले की गंभीरता से जांच करते हैं तो निश्चिततौर पर शिक्षा के नाम पर चल रहे बड़े घोटाले का पर्दार्फाश हो सकता है और जांच में कई ऐसे स्कूलों के नाम भी शामिल हो सकते हैं जो अपने एरिया में अच्छा मुकाम रखते हैं।
डीईओ बोले, करवाई जाएगी मामले की जांच
अंबाला के डीईओ सुधीर कालड़ा ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आ गया है और मामले की जांच करवाई जाएगी। इस मामले में खंड शिक्षा अधिकारी को भेजकर चैक करवाया जाएगा कि आखिर पूरा मामला क्या है। जो भी रिपोर्ट होगी उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
भाजपा सरकार बनने के बाद शिक्षा का व्यवसायीकरण बढ़ा: जर्नादन ठाकुर
अंबाला शहर कांग्रेस के प्रवक्ता जर्नादन ठाकुर ने कहा कि भाजपा की सरकार बनने के बाद प्रदेश में शिक्षा का व्यवसायीकरण बढ़ा है। उन्होंने कहा कि बड़ी हैरानी की बात है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के कारण एक ऐसा स्कूल चल रहा है, जिसमें केवल कागजों में ही बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा विभाग के अधिकारी व भाजपा सरकार शिक्षा के महत्व को समझते है तो इस संबंध में अपना स्पष्टीकरण देना चाहिए और तुरंत ऐसे स्कूल पर कार्रवाई होनी चाहिए, जो बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है।
कांग्रेस के प्रवक्ता जर्नादन ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस की हुड्डा सरकार के समय में बच्चों को शिक्षित करने के लिए कई पॉलिसी बनाई गई थी। रूल 134ए के तहत पहली क्लास से लेकर 12वीं क्लास तक मुफ्त एडमिशन दिया जाता था, लेकिन भाजपा की सरकार ने स्कूल संचालकों के साथ मिलीभगत करते हुए उस रुल को ही खत्म कर दिया। इसी तरह आरटीई के तहत भी मुफ्त बच्चों को पढ़ाने की पॉलिसी कांगे्रस की सरकार ने बनाई थी, लेकिन उसमें भी भाजपा की व अधिकारियों ने स्कूल संचालकों के साथ मिलकर ऐसे बदलाव किए, जिससे लोगों को योजना का लाभ ही नहीं मिल पा रहा है। कांग्रेस के प्रवक्ता जर्नादन ठाकुर ने कहा कि अंबाला के शिक्षा विभाग के अधिकारियों को तुरंत उस स्कूल पर कार्रवाई करनी चाहिए जो नियमों को ताक पर रखते हुए केवल रुपए के लालच में बच्चों के साथ खिलवाड़ करने में लगा है।