ambala coverage news : अम्बाला नगर निगम में बदलाव: शैलजा सचदेवा ने ली मेयर पद की शपथ, क्या होंगे बड़े फैसले?”

अमित कुमार
अंबाला कवरेज @ अंबाला। स्थानीय अम्बाला नगर निगम को अगले करीब 10 महीनों के लिए भाजपा की शैलजा सचदेवा के तौर पर नई मेयर (महापौर)  प्राप्त हो गई है. आज पंचकूला जिले के इन्द्रधनुष स्टेडियम में प्रदेश सरकार के शहरी स्थानीय निकाय विभाग द्वारा आयोजित  राज्य स्तरीय शपथ-ग्रहण समारोह में प्रदेश के साढ़े तीन दर्जन  शहरी  निकायों में प्रत्यक्ष निर्वाचित 10 न.नि  मेयर और 28 नपा.प./ नपा.स. अध्यक्ष  के अतिरिक्त कुल 647 वार्डों से संबंधित निकाय के निर्वाचित  वार्ड सदस्यों (पार्षदों) के साथ साथ शैलजा सचदेवा ने भी पद और निष्ठा की शपथ ली जो उन्हें करनाल मंडल के आयुक्त राजीव रतन द्वारा दिलाई गई. शहर निवासी पंजाब-हरियाणा  हाईकोर्ट  एडवोकेट एवं कानूनी विश्लेषक   हेमंत कुमार ( 9416887788) ने बताया कि हालांकि हरियाणा नगर निगम कानून और उसके अंतर्गत बनाये गए  निर्वाचन नियमों  के अनुसार  अम्बाला मंडल के आयुक्त अंशज सिंह द्वारा अम्बाला नगर निगम मेयर को शपथ दिलाई जानी बनती थी  परन्तु चूँकि करनाल मंडल आयुक्त प्रशासनिक तौर पर अम्बाला मंडल आयुक्त के लिंक ऑफिसर होते हैं, इसलिए अम्बाला मंडल आयुक्त की किसी भी कारण से अनुपस्थिति होने  पर करनाल मंडल आयुक्त भी अम्बाला नगर निगम मेयर को  शपथ दिलाने के लिए सक्षम हैं.बहरहाल, हेमंत ने बताया कि चूँकि मौजूदा अम्बाला नगर निगम का  5 वर्ष का कार्यकाल  करीब 10 महीने पश्चात 13 जनवरी 2026 को पूरा हो  जाएगा एवं उसी दिन नई निर्वाचित नगर निगम  मेयर शैलजा सचदेवा  का कार्यकाल भी समाप्त हो जाएगा.  पांच दिन पूर्व  20 मार्च 2025 को हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जब हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 की धारा 14(1) के अंतर्गत प्रदेश सरकार के शासकीय गजट में एक नोटिफिकेशन मार्फ़त शैलजा सचदेवा का नाम अम्बाला नगर निगम के मेयर के तौर अधिसूचित किया है, उसमें भी  स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि वह अपने पूर्ववर्ती ( अर्थात निवर्तमान मेयर  शक्ति रानी शर्मा) की शेष पदावधि तक  के लिए कार्य करेंगी. हेमंत ने आगे बताया कि गत सप्ताह 16 मार्च 2025 को  अम्बाला नगर नगम की स्थापना हुए 15 वर्ष पूरे हो गए हैं  हालांकि इस  अवसर पर  नगर निगम  प्रशासन द्वारा किसी समारोह  का आयोजन  नहीं किया गया 17 मार्च 2010 को हरियाणा  की   तत्कालीन भूपेंद्र हुड्डा सरकार द्वारा प्रदेश की  तत्कालीन नगर परिषदों  –अम्बाला शहर-अम्बाला सदर, पंचकूला-कालका, यमुनानगर-जगाधरी, हिसार, करनाल, पानीपत और रोहतक को नगर निगम के तौर पर अपग्रेड किया गया था.  उससे पूर्व प्रदेश में केवल फरीदाबाद और गुरुग्राम (पहले गुडगाँव) दो नगर निगमें ही थीं.  हालांकि इसके बाद पहले  जुलाई, 2015 में तत्कालीन सोनीपत नगर परिषद का  दर्जा बढ़ाकर नगर निगम कर दिया गया था और फिर दिसम्बर, 2020 में गुरुग्राम जिले के अंतर्गत पड़ने वाले ओद्योगिक क्षेत्र  मानेसर हेतु भी  नगर निगम स्थापित कर दी गई.

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उन्होंने बताया कि जहाँ तक 17 मार्च 2010 को  अम्बाला नगर निगम की स्थापना का विषय है, तो इसे  स्थापित करने  के लिए तत्कालीन अम्बाला शहर नगर परिषद और अम्बाला सदर (कैंट ) नगर परिषद दोनों को  एक साथ मिला  दिया गया था ताकि संयुक्त  अम्बाला नगर निगम के अंतर्गत पड़ने वाली  आबादी की सीमा तीन लाख पूरी  हो जाए  जोकि हरियाणा में नई नगर निगम स्थापित करने के लिए कानूनन आवश्यक  है. यही  नहीं शहर के साथ लगते कुछ गांवों को भी अम्बाला  नगर निगम में शामिल किया गया था.  तत्कालीन अम्बाला नगर निगम में  कुल वार्ड 20 निर्धारित किये गए थे जिनमें से 11 वार्ड  नगर निगम के शहर जोन (क्षेत्र ) में जबकि 9 वार्ड सदर (कैंट ) जोन में पड़ते थे. इसके  पहले आम चुनाव टलते-टलते इसकी स्थापना के  तीन वर्ष तीन  माह पश्चात 2  जून, 2013 को  करवाए गए थे  एवं 2 जुलाई, 2013 को  निर्दलयी चुनाव जीते रमेश मल को  नगर निगम अम्बाला का  पहला  मेयर चुना गया था. हेमंत ने आगे बताया कि इसके बाद फरवरी, 2018 में   अम्बाला नगर निगम को तोड़कर  शहर और  सदर (कैंट) के लिए दो अलग अलग नगर परिषद् बनाने को स्वीकृति दे दी गयी जिसे तब पंजाब एवं हरियाणा  हाई कोर्ट में चुनौती  दी गयी एवं करीब  डेढ़ वर्ष तक यह मामला कोर्ट में लंबित रहा.  अंतत: जुलाई 2019 में राज्य सरकार ने अम्बाला सदर के लिए अलग नगर परिषद् और अम्बाला शहर के लिए नगर निगम को कायम रखने का निर्णय लिया जिसके बाद हाई कोर्ट से मामले का निपटारा हो गया. 11  सितम्बर, 2019 को  अम्बाला नगर निगम में से तत्कालीन सदर जोन क्षेत्र को बाहर निकाल  फिर से अम्बाला सदर नगर परिषद स्थापित  कर दी गयी. उससे पूर्व 26 जुलाई, 2019 को शहर के 12  गांवों दंडदेहरी, निजामपुर , मानकपुर, लोहगढ़, कालू माज़रा, लिहारसा, घेल कलां, घेल खुर्द, कांवाला एवं कंवाली, देवी नगर और दडियाना  जिनमे 11 ग्राम पंचायतो शामिल थी  को अम्बाला नगर निगम की सीमा में शामिल करने  सम्बन्धी नोटिफिकेशन जारी कर दी गई ताकि अम्बाला नगर निगम की आबादी न्यूनतम 3 लाख बनी रहे. इस प्रकार जुलाई, 2019 में अम्बाला नगर निगम का एक प्रकार से पुनर्गठन हुआ. हेमंत ने आगे बताया कि 27  दिसंबर, 2020  को पुनर्गठित अम्बाला नगर निगम के आम चुनाव करवाए गए एवं 20 वार्ड से निर्वाचित नगर निगम सदस्यों ( जिन्हें आम भाषा में वार्ड पार्षद/कोंसलर कहा जाता है हालांकि यह शब्द हरियाणा नगर निगम कानून में नहीं है) के साथ साथ पहली बार अम्बाला नगर निगम के मेयर का प्रत्यक्ष चुनाव अर्थात स्थानीय मतदातातो द्वारा सीधा निर्वाचन किया  गया जिसमें हजपा (वी ) की प्रत्याशी शक्ति रानी शर्मा निर्वाचित हुई. गत वर्ष अक्टूबर,2024 में शक्ति रानी के कालका वि.स. सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक निर्वाचित होने के बाद अम्बाला नगर निगम का मेयर पद रिक्त हो गया था जिस कारण उपचुनाव कराया गया. वर्ष 2021 में राज्य सरकार द्वारा  अंबाला नगर निगम में 3 नॉमिनेटेड  सदस्य — सुरेश सहोता, संदीप सचदेवा और पूजा चौधरी  मनोनीत किए गए थे. अम्बाला शहर के विधायक चौधरी निर्मल सिंह  और अम्बाला कैंट विधायक और कैबिनेट मंत्री अनिल विज, अम्बाला लोकसभा सांसद वरुण चौधरी और राज्यसभा सांसद कार्तिक (कार्तिकेय) शर्मा अम्बाला नगर निगम के पदेन (पद के कारण) सदस्य है हालांकि यह बात और है कि‌ ये कभी‌ निगम सदन की बैठकों में शामिल नहीं होते.

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