अमित कुमार
अंबाला कवरेज @ चंडीगढ़। गत सप्ताह बुधवार 12 मार्च को प्रदेश की तीन दर्जन शहरी निकायों (8 नगर निगमों, 4 नगरपालिका परिषदों एवं 21 नगरपालिका समितियों) के आम चुनाव और 2 नगर निगमों में महापौर (मेयर) पद के उपचुनाव, 1 नगरपालिका परिषद और 2 नगरपालिका समितियों के अध्यक्ष (प्रेसिडेंट) पद उपचुनाव और तीन नगरपालिका समितियों के 1-1 वार्ड के उपचुनाव के लिए गत 2 और 9 मार्च (पानीपत) को राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा कराये गए मतदान की मतगणना हुई जिसमें प्रत्यक्ष निर्वाचित न.नि महापौर और न.प. अध्यक्ष के अतिरिक्त कुल 647 वार्डों से संबंधित शहरी निकाय के वार्ड सदस्य निर्वाचित हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट और म्युनिसिपल कानून जानकार हेमंत कुमार ने इस सम्बन्ध में रोचक परन्तु महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि मतगणना सम्पन्न होने के बाद हर नगर निगम / नगरपालिका परिषद और नगरपालिका समिति के अंतर्गत पड़ने वाले प्रत्येक शहरी निकाय वार्ड से चुनाव जीतकर निर्वाचित होने वाले विजयी उम्मीदवार को सम्बंधित रिटर्निंग ऑफिसर (आर.ओ.) से जो निर्वाचन प्रमाण-पत्र (इलेक्शन सर्टिफिकेट) प्राप्त हुआ है, उस पर उसे सम्बंधित निकाय अर्थात नगर निगम/ नगरपालिका परिषद / नगरपालिका समिति के सम्बंधित वार्ड का पार्षद नहीं बल्कि सदस्य (मेंबर) शब्द का प्रयोग किया गया है। अब आगामी एक-दो हरियाणा निर्वाचन आयोग द्वारा उक्त शहरी निकायों के 647 वार्डो से चुनाव जीतने वाले सभी उम्मीदवारों के निर्वाचन से सम्बंधित प्रदेश सरकार के गजट में प्रकाशित होने वाली नोटिफिकेशन में भी उनके लिए पार्षद (म्युनिसिपल काउंसलर) नहीं अपितु सदस्य (मेंबर) शब्द का प्रयोग किया जाएगा जोकि कानूनन बिलकुल सही है।
उन्होंने आगे बताया कि हालांकि यह अत्यंत हैरानी की बात है कि न केवल चुनाव जीते उम्मीदवारों एवं उनके समर्थकों आदि द्वारा बल्कि यहाँ तक कि प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक/डिजिटल मीडिया द्वारा उन्हें निर्वाचित वार्ड पार्षद (काउंसलर ) शब्द के तौर पर ही सम्बोधित किया जाता है जिससे निकाय क्षेत्र के मतदाताओं और स्थानीय निवासियों में यही आम धारणा बन गयी है कि उनके संबंधित वार्ड क्षेत्र से चुनाव जीतने वाला उम्मीदवार सम्बंधित नगर निकाय का पार्षद (काउंसलर) ही है जो कि कानूनन गलत है क्योंकि हरियाणा म्युनिसिपल (नगरपालिका ) कानून, 1973 , जो प्रदेश की सभी नगरपालिका समितियों और नगरपालिका परिषदों पर लागू होता है एवं उसके अंतर्गत बनाए गए हरियाणा नगरपालिका निर्वाचन नियमो, 1978 और इसी प्रकार हरियाणा नगर निगम कानून, 1994, जो प्रदेश की सभी नगर निगमों पर लागू होता है एवं उसके अंतर्गत बनाये गए हरियाणा नगर निगम निर्वाचन नियमो, 1994 जिसके आधार पर हरियाणा निर्वाचन आयोग द्वारा प्रदेश के सभी नगर निकायों में चुनाव करवाए जाते हैं। इन सभी में कहीं भी पार्षद (काउंसलर ) शब्द नहीं है। इसकी बजाए उपरोक्त 1973 नगरपालिका कानून की धारा 2 (14 ए) और 1994 नगर निगम कानून की धारा 2 (24) में वार्डो से निर्वाचित होने वालों के लिए सदस्य (मेंबर) शब्द का उल्लेख किया गया है। इसी कारण मतगणना और उसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा सभी निर्वाचित उम्मीदवारों के सम्बन्ध में जारी निर्वाचन नोटिफिकेशन के 30 दिनों अर्थात अगले एक माह के भीतर नगर निगमों के सम्बन्ध में सम्बंधित मंडल आयुक्त और नगरपालिका समितियों और परिषदों के सम्बन्ध में सम्बंधित ज़िले के उपायुक्त (डीसी) द्वारा या उसके द्वारा अधिकृत किसी गज़ेटेड अधिकारी द्वारा नगर निकाय के प्रत्यक्ष निर्वाचित अध्यक्ष और वार्डो से निर्वाचित प्रतिनिधियों को पद और निष्ठा की शपथ भी सम्बंधित नगर निगम/ नगरपालिका परिषद/नगरपालिका समिति के सदस्य के तौर पर ही दिलाई जाएगी न कि सम्बंधित नगर निकाय के पार्षद (काउंसलर) के तौर पर. हेमंत ने बताया कि बेशक देश के सभी राज्यों जैसे पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, चंडीगढ़ आदि में स्थापित नगर निकायों के निर्वाचित सदस्यों द्वारा पार्षद(काउंसलर) शब्द का प्रयोग किया जाता है, परन्तु वहां ऐसा करना कानूनन वैध है क्योंकि उन सभी प्रदेशो के सम्बंधित म्युनिसिपल कानूनों में पार्षद शब्द का उल्लेख किया गया है परन्तु हरियाणा के दोनों नगर निकाय कानूनों में ऐसा नहीं है. यहाँ तक कि भारत के संविधान में म्युनिसिपेलिटी से सम्बंधित अनुच्छेद 243 में भी कहीं पार्षद (म्युनिसिपल काउंसलर) शब्द का उल्लेख नहीं किया गया है.