ambala coverage news : मनोनीत सदस्य संदीप सचदेवा का अपनी पत्नी मेयर शैलजा का प्रतिनिधि बनने पर कानूनी संशय

अमित कुमार
अंबाला कवरेज@ अंबाला।  गत 25 मार्च को  पंचकूला के इन्द्रधनुष स्टेडियम में प्रदेश सरकार के शहरी स्थानीय निकाय विभाग द्वारा आयोजित  राज्य स्तरीय शपथ-ग्रहण समारोह में इसी माह  प्रदेश की  साढ़े तीन दर्जन तीनों  स्तरों की शहरी निकायों  के आम चुनाव और उपचुनाव  में निर्वाचित  करीब सात सौ प्रतिनिधियों को  पद और निष्ठा की शपथ दिलाई गई जिसमें  अम्बाला नगर निगम के मेयर पद के उपचुनाव में प्रत्यक्ष निर्वाचित भाजपा की शैलजा सचदेवा भी शामिल रहीं  जिनका हालांकि कार्यकाल  करीब 9 महीने अर्थात 13 जनवरी, 2026  तक यानि मौजूदा अम्बाला नगर निगम के कानूनन पांच वर्ष के कार्यकाल तक ही रहेगा. वहीं नव-निर्वाचित अम्बाला सदर (कैंट) नगरपालिका परिषद और बराड़ा नगरपालिका परिषद के प्रत्यक्ष निर्वाचित अध्यक्ष (प्रेसिडेंट) और वार्ड सदस्यों का  कार्यकाल पूरे  पांच वर्ष अर्थात मार्च, 2030 तक होगा. इसी बीच शहर निवासी   हाई कोर्ट के एडवोकेट एवं म्युनिसिपल  कानून के जानकार  हेमंत कुमार ने बताया कि 8 नगर निगमों, 4 नगरपालिका परिषदों एवं 21 नगरपालिका समितियों के आम चुनाव सम्पन्न होने के बाद अब प्रदेश सरकार के पास  उपरोक्त सभी 33 नगर निकायों में 2 से 3 सदस्यों को मनोनीत अर्थात नामित करने का कानूनी अधिकार है जिनका पदनाम नॉमिनेटेड मेंबर अर्थात मनोनीत सदस्य होता है. ऐसा करने से पहले हालांकि शहरी स्थानीय विभाग द्वारा प्रदेश के सम्बंधित  ज़िलों के डीसी (उपायुक्तों ) को  पत्र मार्फ़त  उन्हें राज्य के विभिन्न नगर निगमों/नगरपालिका परिषदों/नगरपालिका समितियों में राज्य सरकार द्वारा  मनोनीत किये जाने वाले सदस्यों के तौर पर प्रस्तावित व्यक्तियों के नाम भेजकर  सम्बंधित डीसी से उनके चरित्र सत्यापन   अर्थात उनकी कोई आपराधिक पृष्ठभूमि आदि  न रही  हो के सम्बन्ध में अपनी रिपोर्ट विभाग के  निदेशालय को भेजने को कहा जाता है.

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हेमंत ने बताया कि न  केवल भारत के संविधान के अनुच्छेद 243 (आर)  के अनुसार बल्कि हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 की धारा 4  और हरियाणा नगरपालिका कानून, 1973 की धारा 9 में प्रदेश सरकार द्वारा सम्बंधित नगर निकायों में उन व्यक्तियों को सदस्य के रूप में मनोनीत (नॉमिनेट ) करने का उल्लेख है जो नगरपालिका प्रशासन में विशेष ज्ञान या अनुभव रखते हो.  नगर निगम और नगरपालिका परिषद में अधिकतम 3 जबकि नगरपालिका समिति (कमेटी ) में अधिकतम 2 सदस्यों को राज्य सरकार द्वारा नॉमिनेट किया जा सकता है. भारतीय  संविधान और प्रदेश के नगर निकाय कानूनों  में  नॉमिनेटेड सदस्यों का  प्रावधान इसलिए किया गया क्योंकि आम तौर पर  अधिकांश नगर निकाय के निर्वाचित सदस्य ( जिन्हे आम तौर पर पार्षद कहते हैं  हालांकि यह शब्द/पदनाम   हरियाणा के दोनों नगर निकाय कानूनों  में नहीं है ) म्युनिसिपल प्रशासन के विषय में एक्सपर्ट और अनुभवी नहीं होते, इसलिए राज्य सरकार द्वारा कुछ  विशेषज्ञों और अनुभवी व्यक्तियों  को नगर निगम के सुचारू संचालन और प्रभावी  प्रबंधन हेतु  मनोनीत किया जा सके. हेमंत ने   बताया  कि भारत के संविधान  और हरियाणा नगर निगम  कानून, 1994 की धारा 4 (3) और हरियाणा नगरपालिका कानून, 1973 की धारा 9 (3)   अनुसार   नगर निगम और न.परिषद  में  मनोनीत 3 सदस्य और न. समिति में मनोनीत 2 सदस्य  सदन  की किसी भी बैठक, चाहे सामान्य या विशेष, में शामिल तो हो सकते हैं  परन्तु  वह उस बैठक में   वोट नहीं डाल सकते हैं.  यही नहीं कानूनन वह   सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव भी नहीं लड़ सकते हैं.

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हेमंत ने बताया कि वर्ष 2021 में हरियाणा सरकार द्वारा  मौजूदा अंबाला नगर निगम में एडवोकेट संदीप सचदेवा, सुरेश सहोता एवं पूजा चौधरी को सदस्य मनोनीत किया गया था. अब  क्या मनोनीत सदस्य संदीप सचदेवा अपनी  पत्नी और नव-निर्वाचित मेयर  शैलजा सचदेवा के आधिकारिक तौर पर मेयर प्रतिनिधि बन सकते हैं, इस पर हेमंत ने बताया कि हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 के अनुसार न नगर निगम मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर और न ही न.नि.सदस्य (पार्षद) का कोई भी  प्रतिनिधि बन सकता है फिर वो चाहे उसका पति,पुत्र,ससुर-पिता आदि हो. हालांकि कई महिला न.नि.सदस्यों के पति उनके प्रतिनिधि के तौर पर कार्य करते हैं जो कानूनन सही नहीं है.बहरहाल, संदीप सचदेवा के मामले में विशेष ध्यान देने योग्य तथ्य यह  भी है कि चूँकि वह वर्तमान में अम्बाला नगर निगम में हरियाणा सरकार द्वारा मनोनीत सदस्य है एवं इस कारण  उन्हें प्रतिमाह 15 हज़ार रुपये  मानदेय भी प्राप्त होता है, इसलिए अगर उन्हें अपनी मेयर पत्नी शैलजा सचदेवा  का आधिकारिक तौर पर प्रतिनिधि बनना है तो उन्हें राज्य सरकार से इस बारे में ओपचारिक स्वीकृति प्राप्त कर लेनी चाहिए ताकि इस पर कोई कानूनी पेंच न फंसे और कोई विपक्षी दल या स्थानीय नेता इस पर बेवजह  सवाल न उठाये.

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