अमित कुमार
अंबाला कवरेज @ अंबाला। गत 25 मार्च को पंचकूला के इन्द्रधनुष स्टेडियम में प्रदेश सरकार के शहरी स्थानीय निकाय विभाग द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय शपथ-ग्रहण समारोह में गत माह मार्च में प्रदेश की साढ़े तीन दर्जन तीनों स्तरों की शहरी निकायों के आम चुनाव और उपचुनाव में निर्वाचित करीब सात सौ प्रतिनिधियों को पद और निष्ठा की शपथ दिलाई गई जिसमें अम्बाला नगर निगम के मेयर पद के उपचुनाव में प्रत्यक्ष निर्वाचित भाजपा की शैलजा सचदेवा भी शामिल रहीं जिनका हालांकि कार्यकाल करीब साढ़े 9 महीने अर्थात 13 जनवरी, 2026 तक यानि मौजूदा अम्बाला नगर निगम के कानूनन पांच वर्ष के कार्यकाल सम्पन्न होने तक ही होगा. 20 मार्च 2025 को हरियाणा निर्वाचन आयोग द्वारा जब हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 की धारा 14(1) के अंतर्गत प्रदेश सरकार के शासकीय गजट में एक नोटिफिकेशन मार्फ़त शैलजा सचदेवा का नाम अम्बाला नगर निगम के मेयर के तौर अधिसूचित किया गया, उसमें भी ऐसा स्पष्ट उल्लेख है कि वह अपने पूर्ववर्ती ( अर्थात निवर्तमान मेयर शक्ति रानी शर्मा) की शेष पदावधि तक के लिए कार्य करेंगी. अम्बाला नगर निगम सदन में मेयर के अतिरिक्त निगम क्षेत्र के 20 वार्डों से निर्वाचित सदस्य ( जिन्हें आम तौर पर पार्षद या काउंसलर कहते हैं हालांकि हरियाणा नगर निगम कानून में यह शब्द नहीं हैं) भी हैं जिनमे से एक सीनियर डिप्टी मेयर मीणा ढींगरा और एक डिप्टी मेयर राजेश मेहता हैं.वर्ष 2021 में हरियाणा सरकार द्वारा मौजूदा अंबाला नगर निगम में एडवोकेट संदीप सचदेवा (नव-निर्वाचित मेयर शैलजा सचदेवा के पति), सुरेश सहोता एवं पूजा चौधरी को सदस्य मनोनीत किया गया था. उनके अतिरिक्त अम्बाला शहर के विधायक चौधरी निर्मल सिंह और अम्बाला कैंट विधायक और कैबिनेट मंत्री अनिल विज, अम्बाला लोकसभा सांसद वरुण चौधरी और राज्यसभा सांसद कार्तिक (कार्तिकेय) शर्मा अम्बाला नगर निगम के पदेन (पद के कारण) सदस्य है हालांकि यह चारों कभी नगर निगम सदन की बैठकों में शामिल नहीं होते.
बहरहाल, गत माह 12 मार्च को अम्बाला नगर निगम पद का उपचुनाव जीतने के बाद से शैलजा सचदेवा के पति और नगर निगम के मौजूदा मनोनीत सदस्य संदीप सचदेवा की छवि स्थानीय निवासियों में मेयर प्रतिनिधि के तौर पर बन गई है चूँकि न केवल हर कार्यक्रम और समारोह आदि में वह अपनी पत्नी मेयर शैलजा के साथ साथ रहते हैं बल्कि उनके साथ बैठकर और यहाँ तक कि उनकी अनुपस्थिति में भी वह निगम क्षेत्र के लोगों की समस्याएं सुनकर उन पर कार्रवाई करने का आश्वासन देते हैं. इस सबके बीच महत्वपूर्ण प्रश्न यह उठता है कि क्या अम्बाला नगर निगम के मनोनीत सदस्य संदीप सचदेवा अपनी पत्नी और नव-निर्वाचित नगर निगम मेयर शैलजा सचदेवा का आधिकारिक तौर पर मेयर प्रतिनिधि बन सकते हैं, इस पर स्थानीय निवासी हाईकोर्ट एडवोकेट और म्युनिसिपल कानून के जानकार हेमंत ने बताया कि 20 अगस्त,2021 को हरियाणा सरकार के शहरी स्थानीय निकाय विभाग की एक गजट नोटिफिकेशन द्वारा संदीप और सुरेश सहोता को हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 की धारा 4 (3) में अम्बाला नगर निगम का सदस्य मनोनीत किया गया था जिस प्रावधान में प्रदेश सरकार अधिकतम तीन ऐसे व्यक्तियों को सदस्य नामित कर सकती है जिनका म्युनिसिपल प्रशासन का विशेष ज्ञान और अनुभव हो. उसके बाद अक्टूबर, 2021 में एक महिला पूजा चौधरी को भी इसी प्रकार तीसरे सदस्य के तौर पर मनोनीत किया गया था. भारत के संविधान और हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 की धारा 4 (3) अनुसार नगर निगम सदन में मनोनीत सदस्य सदन की किसी भी बैठक, चाहे सामान्य या विशेष, में शामिल तो हो सकते हैं परन्तु वह किसी भी बैठक में वोट नहीं डाल सकते हैं. यही नहीं वह सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव भी नहीं लड़ सकते हैं. मनोनीत सदस्यों के मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर या डिप्टी मेयर का प्रतिनिधि बनकर कार्य करने पर कानून में कोई प्रावधान या उल्लेख नहीं है.
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बहरहाल, हेमंत ने आगे बताया कि हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 के अनुसार न नगर निगम मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर और न ही न.नि.सदस्य (पार्षद) का कोई भी प्रतिनिधि बन सकता है फिर वो चाहे उसका पति,पुत्र,ससुर-पिता आदि हो. हालांकि कई महिला न.नि.सदस्यों के पति अनाधिकृत तौर पर उनके प्रतिनिधि के तौर पर कार्य करते रहते हैं जो कानूनन सही नहीं है. अम्बाला नगर निगम के पिछले दो मेयरों अर्थात शक्ति रानी शर्मा के कार्यकाल अर्थात जनवरी, 2021 से अक्टूबर,2024 तक और उससे पूर्व रमेश मल के कार्यकाल अर्थात जुलाई, 2013 से जून,2018 तक कोई भी मेयर प्रतिनिधि नहीं था. बहरहाल, संदीप सचदेवा के मामले में विशेष ध्यान देने योग्य तथ्य यह भी है कि नव-निर्वाचित मेयर शैलजा सचदेवा के पति होने के साथ साथ चूँकि वह वर्तमान में अम्बाला नगर निगम में प्रदेश सरकार द्वारा मनोनीत सदस्य भी है एवं जिस कारण उन्हें प्रतिमाह 15 हज़ार रुपये का मानदेय भी प्राप्त होता है, इसलिए एडवोकेट हेमंत का कानूनी मत है कि अगर उन्हें, किसी भी कारण से, अपनी मेयर पत्नी का आधिकारिक प्रतिनिधि बनना है, तो उन्हें राज्य सरकार से इस बारे में विशेष तौर पर ओपचारिक स्वीकृति प्राप्त कर लेनी चाहिए ताकि इस पर कोई कानूनी पेंच न फंसे और कोई विपक्षी दल या स्थानीय नेता इस पर सवाल न उठा सके.