ambala coverage news : योगी दिनेश जिंदल जी की साधना: क्या है 11 दिन की चित्त शुद्धि अनुष्ठान का गहरा अर्थ?

अमित कुमार
अंबाला कवरेज@ अंबाला। संतोष भवन, जीवन नगर में आज से योगी दिनेश जिंदल जी के 11 दिवसीय चित्त शुद्धि अनुष्ठान का शुभारंभ हुआ। अनुष्ठान की शुरुआत उन्होंने अखंड ज्योत प्रज्वलित कर माता रानी से प्रार्थना के साथ की, ताकि उन्हें साधना के लिए दिव्य ऊर्जा और आशीर्वाद प्राप्त हो।योगी दिनेश जी ने बताया कि पहले दिन उनका केवल फलाहार रहेगा, जिससे शरीर और मन की शुद्धि बनी रहे। प्रार्थना के पश्चात वे गहन ध्यान साधना में लीन हो गए। यह अनुष्ठान पूरी तरह से एकांत में किया जा रहा है, जहां वे आत्मशुद्धि और चित्त की शांति के लिए विशेष साधना कर रहे हैं।  इस 11 दिवसीय अनुष्ठान के दौरान योगी जी संयम, तप और ध्यान के माध्यम से आंतरिक चेतना को जागृत करने का प्रयास करेंगे। वे स्वयं को बाहरी दुनिया से अलग रखते हुए पूर्ण अनुशासन और साधकव्रत का पालन कर रहे हैं। उनका यह अनुष्ठान आत्मिक शुद्धि, मानसिक स्थिरता और आध्यात्मिक ऊर्ध्वगमन का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।  योगी दिनेश जी ने बताया कि उन्हें इस अनुष्ठान की प्रेरणा लॉकडाउन के दौरान मिली, जब उन्होंने लम्बी ध्यान-साधना की आवश्यकता को अनुभव किया। चूंकि वे **आर्ट ऑफ लिविंग** के प्रशिक्षित शिक्षक हैं, ध्यान की गहरी समझ उनके पास पहले से थी। उन्होंने बताया कि ध्यान एक ऐसा माध्यम है, जो साधक को अंतर्मन की गहराइयों तक ले जाता है और आत्मिक उन्नति के द्वार खोलता है।
अनुष्ठान के पहले दिन योगी जी ने *कॉन्शियस माइंड और सबकॉन्शियस माइंड* की शक्ति पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि जो भी हम अपने जीवन में प्राप्त करना चाहते हैं, उसके लिए हमारे भीतर कितनी प्रबल इच्छा है, यह महत्वपूर्ण होता है। ईश्वर हमारी निष्ठा और समर्पण को देखते हैं। जब हम अपनी चेतना को पूर्ण रूप से केंद्रित कर किसी लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं, तो संपूर्ण सृष्टि हमें उसकी प्राप्ति में सहायक होती है।  योगी जी ने कहा कि ध्यान केवल शांति का साधन नहीं, बल्कि आत्मा की शक्ति को जागृत करने की प्रक्रिया है। इस अनुष्ठान में वे अपनी चेतना को उच्च स्तर पर ले जाने के लिए विशेष ध्यान पद्धतियों का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, *”चित्त की शुद्धि ही सच्ची साधना है। जब मन निर्मल होता है, तभी आत्मा की रोशनी प्रकट होती है।”* योगी जी ने बताया कि हमें रोज़ाना कम से कम 20 मिनट ध्यान करना चाहिए, जिससे मन की चंचलता कम होती है, एकाग्रता बढ़ती है और व्यक्ति अपने अंदर गहरी शांति का अनुभव करता है।  यह अनुष्ठान आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर लोगों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन सकता है। योगी दिनेश जिंदल जी की यह साधना न केवल व्यक्तिगत उन्नति के लिए है, बल्कि समस्त मानवता के कल्याण की भावना से प्रेरित है। उनका मानना है कि जब एक साधक अपने मन को पूर्ण रूप से निर्मल कर लेता है, तो उसकी ऊर्जा संपूर्ण जगत के कल्याण में सहायक बनती है।

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