आज़ाद के नए शो ‘पवित्रा भरोसे का सफर’ में नजर आ रही हैं ये एक्ट्रेस
अंबाला कवरेज @ मुंबई। शिवानी चक्रवर्ती भारत के गांव प्रेमियों के पहले मनोरंजन चैनल आज़ाद के नए शो ‘पवित्रा भरोसे का सफर’ में रेखा ठाकुर के रोल में दर्शकों का दिल जीत रही हैं। वो ठाकुर परिवार की बड़ी बहू का रोल निभा रही हैं। वो बहुत ही सरल और सकारात्मक किरदार है, जो ठाकुर परिवार में ब्याही गई हैं। वो दहेज नहीं दे सकी थीं, इसलिए घर में उनकी कोई नहीं सुनता और उन्हें हमेशा चुप रहना पड़ता है। यहां तक कि उन्हें खरी-खोटी सुनाई जाती है। एक मां होते हुए भी वो अपने बेटे को प्यार नहीं दे सकतीं या अपना अधिकार नहीं जता सकतीं। उन्हें वो प्यार और सम्मान नहीं मिलता, जो एक बड़ी बहू को मिलना चाहिए। शिवानी का जन्म और परवरिश मध्य प्रदेश के खंडवा में हुई है। उन्होंने 2005 में मिस नाशिक जीता, बूगी वूगी में दो बार फाइनलिस्ट रही हैं और उनके कुछ बेहतरीन कामों में निमकी मुखिया, निमकी विधायक, शक्ति, मिसेज़ कौशिक की पांच बहुएं, जुगनी चली जालंधर, ऐसे करो ना विदा, तारक मेहता का उल्टा चश्मा और अजब गजब घर जमाई शामिल हैं। यहां, शिवानी अपने नए शो और बहुत कुछ के बारे में बात करती हैं।
– आपने किस बात से प्रेरित होकर आज़ाद का नया शो पवित्रा स्वीकार किया?
मैंने पवित्रा भरोसे का सफर इसलिए चुना क्योंकि मुझे इस शो का कॉन्सेप्ट वाकई पसंद आया। यह महिला सशक्तिकरण के बारे में एक बहुत ही प्रगतिशील और अच्छा विषय है। एक महिला होने के नाते मैं इसे आज के समय में बहुत अच्छा टॉपिक मानती हूं। दर्शकों तक इस संदेश को पहुंचाने के लिए पवित्रा को एक बहुत मजबूत किरदार के रूप में दिखाया गया है। पवित्रा में मेरा किरदार भी दमदार और सकारात्मक है। अगर हमारा शो और हमारे किरदार लोगों को प्रेरित कर सकें तो अच्छा होगा। आज भी, कई घरों में लड़कियों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जाता है, और समाज के लिए यह जरूरी है कि लोग अपनी मानसिकता बदलें और महिलाओं को शिक्षित, आर्थिक रूप से स्वतंत्र और अपने एवं अपने परिवार की देखभाल करने में सक्षम बनाएं।ambala today news: पढ़िए खबर: महामारी के दौरान शूटिंग करना बड़ा मुश्किल है शिवानी चक्रवर्ती
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– शो में अपने रोल के बारे में बताएं?
रेखा ठाकुर, ठाकुर परिवार की बड़ी बहू हैं। वो बहुत ही सरल और सकारात्मक किरदार है जो एक गरीब परिवार से हैं और ठाकुर परिवार में ब्याही गई हैं। वो दहेज नहीं दे सकी थीं, इसलिए घर में उनकी कोई नहीं सुनता और उन्हें हमेशा चुप रहना पड़ता है। यहां तक कि उन्हें खरी-खोटी सुनाई जाती है। एक मां होते हुए भी वो अपने बेटे को प्यार नहीं दे सकतीं या अपना अधिकार नहीं जता सकतीं। उन्हें वो प्यार और सम्मान नहीं मिलता, जो एक बड़ी बहू को मिलना चाहिए।
– आज़ाद गांव प्रेमी दर्शकों के लिए है? इस कहानी में ऐसा क्या है, जो बाकी शोज़ शो से अलग है?
इस शो और आज़ाद की खास बात यह है कि यह गांव प्रेमी दर्शकों से जुड़ेगा। यह शो हमारे समाज की हकीकत दर्शाता है और हमें बताता है कि क्या सही नहीं है और हम कैसे और ज्यादा प्रगतिशील हो सकते हैं। आज़ाद भारतीय मूल्यों और परंपराओं का प्रतीक है और ऐसी कहानियां दिखाता है, जो हमें जड़ से जोड़े रखते हुए भी प्रेरित और शिक्षित करती हैं। आज़ाद के शोज़ विशेष रूप से गांव प्रेमी दर्शकों के लिए बनाए गए हैं और बाकी चैनलों से बिलकुल अलग हैं, जिनमें सिर्फ शहरी नजरिए से कहानियां दिखाई जाती हैं।
– आपने शो के लिए कैसे तैयारी की?
अपने शो के लिए तैयारी करना हर एक्टर के लिए बहुत जरूरी होता है। जैसे ही मुझे अपनी भूमिका के बारे में पता चला, मैं उत्साहित हो गई और इसे लेकर काम शुरू कर दिया, क्योंकि यह पहली बार है जब मैंने इतना शांत और शालीन किरदार निभाया है। मैं हमेशा अपने निर्देशक के निर्देशों का पालन करने की कोशिश करती हूं और चूंकि मैं नीलू वाघेला जी जैसी बेहतरीन अदाकारा के साथ स्क्रीन शेयर कर रही हूं तो वे मुझे बेहतर काम करने में भी मदद करती है।
इस समय महामारी के बीच शूटिंग करने का अनुभव कैसा है?
इस महामारी के बीच शूटिंग करना और घर से बाहर काम करना बहुत मुश्किल है। हालांकि मैं दोनों वैक्सीन लगवा चुकी हूं, फिर भी मेरे मन में थोड़ा डर लगा रहता है कि हम बाहर जा रहे हैं और खुद को एक अज्ञात वायरस के संपर्क में ला रहे हैं जिसने इतने सारे लोगों की जान ले ली है। लेकिन सबसे अच्छी बात यह है कि हम उचित स्वच्छता सहित सभी कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हैं, हमेशा मास्क पहनते हैं और सुरक्षित रहने के लिए हर एहतियात बरतते हैं। जो बात हमारा उत्साह बनाए रखती है वो ये कि हम लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं और कुछ अच्छा काम कर रहे हैं, और यह सोचकर हम प्रेरित होते हैं और हमारा डर भी दूर रहता है।
अपने शुरुआती वर्षों के बारे में बताएं? आप एक्टर कैसे बनीं?
हर किसी का एक सफर और एक बैकस्टोरी होती है। मेरी भी है और मेरी यात्रा काफी उतार-चढ़ाव भरी रही है, क्योंकि मैं कोरियोग्राफर बनना चाहती थी। और फिर, मैंने मॉडलिंग की थी और मिस नाशिक 2005 जीता था, क्योंकि मैं फैशन डिजाइनिंग सीखने के लिए नाशिक में रहती थी। मुझे डांस करना पसंद है और मैं डांस में कुछ करना चाहती थी। मुंबई आने के बाद मैंने कोरियोग्राफर्स को भी असिस्ट किया, लेकिन तकदीर ने मेरे लिए कुछ और ही तय कर रखा था और मैं एक्टर बन गई। मैंने ऑडिशन देना शुरू कर दिया और कुछ अच्छे शोज़ हासिल किए और अब मुझे आज़ाद पर ‘पवित्रा भरोसे का सफर’ के साथ एक शानदार अवसर मिला है।
अपने अब तक किए गए काम के बारे में बताएं?
मैंने 2005 में मिस नाशिक का खिताब जीता, बूगी वूगी में दो बार फाइनलिस्ट रही और मेरे कुछ बेहतरीन कामों में निमकी मुखिया, निमकी विधायक, शक्ति, मिसेज़ कौशिक की पांच बहुएं, जुगनी चली जालंधर, ऐसे करो ना विदा, तारक मेहता का उल्टा चश्मा और अजब गजब घर जमाई शामिल हैं।
टीवी पर काम करना आपको क्यों आकर्षक लगता है?
टेलीविजन में काम करना किसे पसंद नहीं होगा, क्योंकि यह आपको भारत के हर घर तक पहुंचने का मौका देता है। यह मनोरंजन के माध्यम से एक संदेश देता है। हम बहुत सारे किरदार निभाते हैं और हमें कई तरह के रोल करने का मौका मिलता है। टेलीविजन आपको हर घर में फेमस कर देता है और हर कोई इसे चाहता है। सुर्खियों में रहने के लिए, प्रसिद्धि पाने के लिए और अपने परिवार को गर्व महसूस कराने के लिए… टीवी पर एक्टिंग करने से मुझे ये सब और बहुत कुछ मिलता है। यह अब तक रचनात्मक रूप से एक बहुत ही संतोषजनक सफर रहा है।
आपका पसंदीदा शौक क्या हैं?
डांस मेरा शौक और जुनून है।
आप किस जगह पर छुट्टियां बिताना चाहेंगी?
वैसे मेरी बकेट लिस्ट लंबी है। अगर मैं भारत में छुट्टियों के लिए जाना चाहूंगी, तो मैं ऋषिकेश जाना चाहती हूं क्योंकि यह बहुत आकर्षक है और बहुत शांतिपूर्ण लगता है। विदेश में निश्चित रूप से पेरिस, ग्रीस और मालदीव में छुट्टियां बिताना पसंद करूंगी।
आपके लिए क्या महत्वपूर्ण है?
जीवन में हर चीज के प्रति सकारात्मक नजरिया और चुनौतियों से लड़ते रहना मेरे लिए महत्वपूर्ण है और अपने चेहरे पर मुस्कान जरूरी है।
देखिए पवित्रा भरोसे का सफर, हर सोमवार से शनिवार रात 9:30 बजे आज़ाद पर। यह चैनल टाटा स्काई पर 183, डीडी फ्रीडिश चैनल नंबर 36 पर उपलब्ध है और एमएक्स प्लेयर पर मुफ्त में देखा जा सकता है।
बिगिनेन मीडिया:
बिगिनेन मीडिया की शुरुआत अक्टूबर 2019 में हुई थी और इसका मुख्यालय मुंबई में स्थित है। जैसा कि इसका नाम है, बिगिनेन असल में जर्मन शब्द है, जिसका मतलब है ‘कुछ नए की शुरुआत’। इस संस्थान का उद्देश्य जनता-आधारित उत्पादों और सेवाओं को बढ़ावा देना है। यह ग्रामीण दर्शकों के लिए विशेष तौर पर तैयार की गई प्रभावशाली कहानियों के जरिए उन्हें एक बढ़िया अनुभव देना चाहता है और हर उस जगह मौजूद रहना चाहता है, जहां दर्शक हैं। जो जन-आधारित विचारधारा बिगिनेन मीडिया को परिभाषित करती है, उसमें लंबे समय तक ग्राहकों से रिश्ता बनाए रखने के सिद्धांत शामिल हैं। इसका उद्देश्य नए, विश्वसनीय, रचनात्मक मनोरंजक अनुभव देना और संबंधित मल्टीमीडिया उत्पादों को विकसित करना है। बिगिनेन मीडिया का रणनीतिक मूल्य है नवीनता, जो इसकी कॉरपोरेट संस्कृति का मूलभूत हिस्सा है। यह संस्थान, संगठन की शक्ति में यकीन रखता है और इसके प्रमुख मूल्यों में लोगों की मांग का ख्याल रखना, सभी को शामिल करना, विविधता अपनाना, संवेदनशील रहना, बाजार पर केंद्रित रहना और सभी तक पहुंच बनाना शामिल है।
आज़ाद चैनल
बिगिनेन मीडिया की पहली पेशकश है आज़ाद, जो भारत का पहला ऐसा प्रीमियम हिंदी एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म है, जिसमें विशेष तौर पर ग्रामीण विचारधारा और ग्रामीण परिवेश के लिए कार्यक्रम दिखाए जाएंगे। पीपल फर्स्ट. रूरल फर्स्ट (सबसे पहले जनता, सबसे पहले ग्रामीण) के अपने उद्देश्य के साथ आज़ाद चैनल, मई 2021 से डीडी फ्री डिश और प्रमुख क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे चुनिंदा डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म ऑपरेटर्स पर उपलब्ध है। इसमें ड्रामा, एक्शन और रोमांस के साथ-साथ मनोरंजक फिल्में और बच्चों के कार्यक्रम आदि दिखाए जा रहे हैं। आज़ाद डीडी फ्री डिश पर चैनल नंबर 36 पर उपलब्ध है।ambala today news: पढ़िए खबर: महामारी के दौरान शूटिंग करना बड़ा मुश्किल है शिवानी चक्रवर्ती