अंबाला कवरेज @ तनु खुरालिया। शिक्षा नियमावली के रूल 134ए के तहत मुफ्त एडमिशन का इंतजार कर रहे अभिभावकों के साथ साथ उन बच्चों की भी उम्मीद टूटती नजर आ रही है, जिन्हें सरकार पर विश्वास था कि उसका मुफ्त एडमिशन प्राइवेट स्कूलों में करवा दिया जाएगा। करीब दो महीने से अभिभावक डीईओ आफिस तो कभी बीईओ आफिस के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन बच्चों को रूल 134ए के तहत एडमिशन मिलने की बजाए केवल आश्वासन मिल रहे हैं। अभिभावकों को उम्मीद थी कि 28 फरवरी को माननीय हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई होगी और फिर शायद एडमिशन हो जाए, लेकिन कोरोना के कारण माननीय हाईकोर्ट ने हरियाणा प्राइवेट स्कूल क्रांफे्रैस द्वारा दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई बढ़ाकर अब 18 अक्टूबर 2022 कर दी है। जिसके बाद अब नए सत्र में भी रूल के तहत एडमिशन मिलने की संभावनाओं पर तलवार लटकती दिखाई दे रही है।
शिक्षा नियमावली के रूल 134ए के तहत हरियाणा सरकार द्वारा दिसंबर 2021 में बच्चों के असेस्टमेंट टेस्ट लिए जाने के बाद स्कूल अलार्ट कर दिए गए थे। जिसके बार हरियाणा प्राइवेट स्कूल कांफ्रैंस (एचपीएससी) की ओर से सरकार द्वारा लिए गए फैसले के खिलाफ माननीय हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जिसमें एचपीएससी ने तर्क दिया था स्कूल संचालकों न तो नियमों के अनुसार रिइंबसमेंट दी जा रही है और नही पिछले सालों का बकायदा दिया गया है। इसके साथ ही एचपीएससी ने तर्क दिया था कि यह सत्र खत्म होने को है और ऐसे में आखिरी में बच्चों को रूल के तहत एडमिशन देने सही नहीं। जिसके बाद माननीय हाईकोर्ट ने एचपीएससी की याचिका पर सुनवाई करते हुए राहत प्रदान की थी और मामले को 28 फरवरी तक सुनवाई के लिए रख दिया था। साथ ही माननीय कोर्ट ने यह भी कह दिया था कि यदि स्कूल संचालकों रूल के तहत एडमिशन नहीं देते तो विभागीय अधिकारियों द्वारा किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जा सकती। जिसके बाद प्रदेशभर में निजी स्कूल संचालकों रूल के तहत मुफ्त एडमिशन की चाहत रखने वाले बच्चों को एडमिशन नहीं दिया। प्रदेशभर की बात की जाए तो करीब 20 से 25 प्रतिशत बच्चों को ही एडमिशन मिल पाया था।
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एचपीएससी के लगातार दबाव के बीच हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर को खुद इस मामले में खुले मंच से विवाद को खत्म करने की बात कही गई और स्कूल संचालकों की मांग को देखते हुए रिइंसबमेंट की राशि भी बढ़ाई गई। इतना होने के बावजूद भी निजी स्कूल संचालक संतुष्ट न नहीं आए और एचपीएससी के बैनर तले लगातार ये ही डिमांड करते रहे कि रिइंबसमेंट आरटीई में तहत दिया जाए। फिलहाल माननीय हाईकोर्ट द्वारा सुनवाई की तारीख को 18 अक्टॅूबर 2022 कर दिए जाने के बाद अब कहीं न कहीं मुुफ्त एडमिशन का इंतजार कर रहे बच्चों को झटका है और ऐसे में उन्हें एडमिशन मिलना ओर भी ज्यादा मुश्किल हो गया है।
आखिर अब कैसे मिला सकता है मुफ्त एडमिशन
फिलहाल मामला माननीय कोर्ट में विचाराधीन है और ऐसे में यदि सरकार चाहे तो रूल 134ए के तहत दी जाने वाली रिइंबसमेंट को आरटीई के अनुसार करके मामले को तुरंत खत्म कर सकती है। फिलहाल यह भी सही है कि सरकार यह बात जानती है कि यदि रिइंसबमेंट आरटीई के अनुसार की तो बजट बेहद ज्यादा हो जाएगा,लेकिन वहीं दूसरी तरफ हरियाणा सरकार ने इस रूल के तहत फर्जी एडमिशन लेने वालों को रोकने के लिए उनके इनकम सर्टिफिकेट की जांच करवाने के आदेश दिए हुए हैं। फिलहाल यह कहने में कोई गुरेज नहीं कि इस मामले को निपटाने और बच्चों को मुफ्त एडमिशन दिलाना सरकार के हाथ में है और अभी तक सरकार कहीं भी इस मामले में गंभीर नजर नहीं आई।
हम केवल अपना हक मांग रहे हैं: सुरेश चंद्र
एचपीएससी के उपाध्यक्ष सुरेश चंद्र ने कहा कि स्कूल संचालक सालों से रूल 134ए के तहत मुफ्त एडमिशन देते आए हैं, लेकिन सरकार ने आरटीई के अनुसार रिइंबसमेंट नहीं दी। उन्होंने कहा कि माननीय हाईकोर्ट में रिइंबसमेंट सहित अन्य रूल के तहत लिए जाने वाले एग्जाम व अन्य कई बिंदूओं पर केस चल रहा है जिसकी अब तारीख 18 अक्टूबर 2022 कर दी गई है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार रूल की खामियों को दूर नहीं करती तब तक इस रूल के तहत किसी को एडमिशन नहीं दिया जाएगा। माननीय हाईकोर्ट ने अपने आदेशों में स्पष्ट कर रखा है कि यदि स्कूल एडमिशन नहीं देते तो किसी तरह की स्कूलों पर कार्रवाई नही की जा सकती।